जब बिहार बंगाल प्रेसिडेंसी से अलग होकर एक स्वतंत्र राज्य के रूप में मानचित्र पर उभरा था, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि ज्ञान और लोकतंत्र की यह जननी एक दिन आधुनिक भारत के विकास की धुरी बनेगी।
- बिहार दिवस 2026: गांधी मैदान में जश्न शुरू, जानें इस बार की थीम और मुख्य आकर्षण
पटना (विशेष प्रतिनिधि): जब बिहार बंगाल प्रेसिडेंसी से अलग होकर एक स्वतंत्र राज्य के रूप में मानचित्र पर उभरा था, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि ज्ञान और लोकतंत्र की यह जननी एक दिन आधुनिक भारत के विकास की धुरी बनेगी। आज, 22 मार्च 2026 को बिहार अपनी स्थापना की 114वीं वर्षगांठ 'बिहार दिवस' के रूप में पूरे हर्षोल्लास के साथ मना रहा है।
उद्घाटन और मुख्य समारोह
राजधानी पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान आज सुबह से ही केसरिया, सफेद और हरे रंगों की छटा में सराबोर है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दीप प्रज्वलित कर तीन दिवसीय राजकीय समारोह का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की पहचान इसकी मेधा, परिश्रम और गौरवशाली इतिहास से है। उन्होंने राज्य की महिलाओं, युवाओं और किसानों को विकास का असली सारथी बताया। इस वर्ष के उत्सव की मुख्य थीम "विकासशील बिहार" रखी गई है, जो राज्य की औद्योगिक प्रगति, डिजिटल साक्षरता और आधारभूत संरचना में हो रहे बदलावों को समर्पित है।
सांस्कृतिक संध्या: सुरों से सजा गांधी मैदान
बिहार दिवस की पहली शाम सांस्कृतिक विरासत के नाम रही। देश की मशहूर गायिका सोना महापात्रा ने जब मंच संभाला, तो पूरा गांधी मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उनके सूफी और लोक गीतों के फ्यूजन ने युवाओं के साथ-साथ बुजुर्गों को भी झूमने पर मजबूर कर दिया। स्थानीय कलाकारों ने भी जट-जटिन, बिदेसिया और सामा-चकेवा जैसे पारंपरिक नृत्यों की प्रस्तुति देकर बिहार की मिट्टी की सोंधी महक बिखेरी।
आकर्षण का केंद्र: शिक्षा मंडप और व्यंजन मेला
गांधी मैदान के भीतर अलग-अलग दीर्घाएं बनाई गई हैं, जिनमें 'शिक्षा मंडप' विशेष रूप से छात्रों को लुभा रहा है। यहाँ बिहार के गौरवशाली नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालय के इतिहास के साथ-साथ भविष्य की 'स्मार्ट क्लास' का मॉडल दिखाया गया है।
दूसरी ओर, 'व्यंजन मेला' में स्वाद के शौकीनों की भारी भीड़ उमड़ रही है। यहाँ बिहार के पारंपरिक लिट्टी-चोखा, गया के तिलकुट, और मनेर के लड्डू के स्टालों के बगल में ही बिहार के उभरते हुए एग्री-टेक और फूड स्टार्टअप्स के स्टाल लगाए गए हैं। यह संगम दिखाता है कि बिहार अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है लेकिन आधुनिकता की दौड़ में भी पीछे नहीं है।
राष्ट्रीय स्तर पर गूंज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस खास मौके पर बिहारवासियों को पत्र लिखकर अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा, "बिहार की भूमि साहस और ज्ञान की भूमि है। यहाँ के लोगों ने देश के विकास में अमूल्य योगदान दिया है।" राज्यपाल ने भी राजभवन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में बिहार की प्रगति की सराहना की।
सुरक्षा और जनभागीदारी
लाखों की संभावित भीड़ को देखते हुए पटना जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। पूरे गांधी मैदान और आसपास के क्षेत्रों में 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के अलावा ड्रोन के जरिए हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है। जगह-जगह हेल्प डेस्क और मेडिकल कैंप स्थापित किए गए हैं।
निष्कर्ष: बिहार दिवस केवल एक तारीख नहीं, बल्कि हर बिहारी के लिए अपनी पहचान पर गर्व करने का दिन है। 24 मार्च तक चलने वाला यह महोत्सव न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह बदलते हुए बिहार की एक ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है जो अब आत्मनिर्भरता और समृद्धि की ओर अग्रसर है।

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