हिंदी साहित्य और भोजपुरी की समृद्ध परंपरा के धरोहर, पद्मश्री से सम्मानित आचार्य शिवपूजन सहाय की यादें धीरे-धीरे धुंधली होती जा रही हैं। ऐसे में उनकी विरासत को जीवंत बनाए रखने का संकल्प बक्सर के निवासी और भाजपा विधि प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष अधिवक्ता सुमन कुमार श्रीवास्तव ने लिया है।
बक्सर, बिहार न्यूज़ प्रिंट
हिंदी साहित्य और भोजपुरी की समृद्ध परंपरा के धरोहर, पद्मश्री से सम्मानित आचार्य शिवपूजन सहाय की यादें धीरे-धीरे धुंधली होती जा रही हैं। ऐसे में उनकी विरासत को जीवंत बनाए रखने का संकल्प बक्सर के निवासी और भाजपा विधि प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष अधिवक्ता सुमन कुमार श्रीवास्तव ने लिया है।
सुमन श्रीवास्तव ने बिहार सरकार के शीर्ष नेतृत्व, विशेष रूप से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को आचार्य शिवपूजन सहाय की साहित्यिक कृतियों से अवगत कराया। साथ ही उन्होंने मांग रखी कि सहाय जी की जन्मभूमि उनवास (इटाढ़ी प्रखंड) में उनके नाम पर एक पार्क का निर्माण किया जाए तथा इटाढ़ी-धनसोई मार्ग का नामकरण “आचार्य शिवपूजन सहाय रोड” के रूप में किया जाए। इस प्रस्ताव पर सरकार की ओर से सकारात्मक आश्वासन मिला है।
गौरतलब है कि आचार्य शिवपूजन सहाय का जन्म 9 अगस्त 1893 को बक्सर जिले के उनवास गांव में हुआ था, जबकि 21 जनवरी 1963 को उनका निधन हुआ। उन्होंने हिंदी साहित्य में कई महत्वपूर्ण उपन्यास, कहानियां और कविताएं लिखीं, जिससे पूरे देश में उनकी पहचान बनी और बक्सर जिले का नाम भी गौरवान्वित हुआ।
अधिवक्ता सुमन श्रीवास्तव लगातार उनके जयंती और पुण्यतिथि पर कार्यक्रम आयोजित कर समाज को उनकी साहित्यिक विरासत से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। उनका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों तक आचार्य शिवपूजन सहाय के योगदान को पहुंचाना और उनकी स्मृतियों को स्थायी रूप देना है।

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