65 किलो गांजा तस्करी मामले में पटना हाईकोर्ट ने 2 नाबालिगों को दी जमानत। गुवाहाटी से पटना तक बिना चेकिंग पहुंचने पर जताई हैरानी, SSP जांच के आदेश।
डिजिटल डेस्क, पटना। पटना हाईकोर्ट ने 65 किलोग्राम से अधिक गांजा तस्करी के आरोप में पकड़े गए दो नाबालिगों को जमानत दे दी है। इसके साथ ही अदालत ने इस बात पर गहरी हैरानी जताई कि बिना किसी वैध पहचान-पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस या वाहन के दस्तावेजों के दोनों किशोर गुवाहाटी (असम) से पटना तक इतनी बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ लेकर बिना किसी रोक-टोक के कैसे पहुंच गए। अदालत ने इस पूरे मामले की गहन जांच का जिम्मा पटना के सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) को सौंपा है।
गाड़ी के चेसिस में छिपाए थे 109 पैकेट जस्टिस अरुण कुमार झा की एकल पीठ डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) के मामले से जुड़ी दो क्रिमिनल रिविजन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। जांच के दौरान एक महिंद्रा TUV गाड़ी के चेसिस और फुटस्टेप के बीच बनाई गई गुप्त जगहों से कुल 109 प्लास्टिक पैकेट बरामद किए गए थे, जिनमें 65.940 किलोग्राम (शुद्ध वजन 63.760 किलो) गांजा भरा था।
डीआरआई ने शुरुआती कार्रवाई में आरोपियों की उम्र 25 और 21 वर्ष बताई थी, लेकिन जांच के बाद जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) ने दोनों की उम्र घटना के समय क्रमशः 15 वर्ष 9 महीने और 16 वर्ष तय करते हुए उन्हें 'कानून के साथ संघर्षरत बच्चा' (CICL) घोषित किया। हालांकि, निचली अदालतों ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
जेजे एक्ट के तहत जमानत नियम, जेल अपवाद: हाईकोर्ट हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 12 के तहत किसी भी नाबालिग (CICL) को जमानत देना सामान्य नियम है। जमानत केवल तभी रोकी जा सकती है जब इस बात के पुख्ता प्रमाण हों कि रिहाई के बाद बच्चा किसी ज्ञात अपराधी के संपर्क में आएगा, शारीरिक-मानसिक खतरे में पड़ेगा या इससे न्याय का उद्देश्य विफल होगा। अदालत ने माना कि अपराध की भयावहता या गंभीरता अपने आप में किसी नाबालिग की जमानत खारिज करने का कानूनी आधार नहीं हो सकती।
गुवाहाटी से पटना तक सुरक्षा में भारी चूक, SSP करेंगे जांच अदालत ने इस बात पर गंभीर चिंता व्यक्त की कि दोनों नाबालिग बिना किसी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, ड्राइविंग लाइसेंस या आईडी प्रूफ के हजारों किलोमीटर गाड़ी चलाकर असम से बिहार के दीदारगंज तक पहुंच गए और रास्ते में उन्हें किसी चेकपोस्ट पर पकड़ा नहीं गया।
कोर्ट ने पटना एसएसपी को निर्देश दिया कि वे 3 महीने के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट पेश करें। जांच में यह पड़ताल की जाएगी कि:
क्या दोनों आरोपी वास्तव में नाबालिग हैं?
क्या उन्होंने कभी औपचारिक शिक्षा ली या सरकारी योजनाओं में उम्र का कोई प्रमाण पत्र दिया था?
अंतरराज्यीय यात्रा के दौरान सुरक्षा और नाकाबंदी में कहां और किस स्तर पर गंभीर चूक हुई?
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच में उम्र छुपाने या धोखाधड़ी का कोई साक्ष्य मिलता है, तो राज्य सरकार और डीआरआई तुरंत जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड या सक्षम अदालत में जाकर उनकी जमानत रद्द कराने के लिए स्वतंत्र होंगे।
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