Ticker

6/recent/ticker-posts

संजय कपूर का ₹30,000 करोड़ का विरासत का विवाद, सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ को मीडिएटर किया नियुक्त

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिवंगत बिजनेसमैन संजय कपूर की ₹30,000 करोड़ की संपत्ति को लेकर चल रहे पारिवारिक विवाद में बड़ा दखल दिया।

संजय कपूर का ₹30,000 करोड़ का विरासत का विवाद, सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ को मीडिएटर किया नियुक्त

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिवंगत बिजनेसमैन संजय कपूर की ₹30,000 करोड़ की संपत्ति को लेकर चल रहे पारिवारिक विवाद में बड़ा दखल दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस अहम मामले को सुलझाने के लिए भारत के पूर्व चीफ जस्टिस (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ को मीडिएटर नियुक्त किया।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और उज्जल भुयान की बेंच ने मामले में सभी पक्षों के मीडिएशन के लिए सहमत होने के बाद यह आदेश जारी किया।

पारिवारिक झगड़ों को मनोरंजन का जरिया न बनाएं
सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया और दोनों पक्षों—संजय कपूर की पत्नी, प्रिया सचदेव कपूर, और उनकी मां, रानी कपूर—से इस विवाद को पब्लिक प्लेटफॉर्म या सोशल मीडिया पर न ले जाने का आग्रह किया।

बेंच ने साफ कहा, "यह एक पारिवारिक विवाद है; इसे परिवार तक ही सीमित रहने दें।" इसे जनता के मनोरंजन का ज़रिया नहीं बनाया जाना चाहिए। कोर्ट ने संजय कपूर की एक्स-वाइफ और एक्ट्रेस करिश्मा कपूर के बच्चों समेत सभी शामिल पार्टियों से खुले दिमाग से मीडिएशन प्रोसेस में शामिल होने की अपील की।

इस झगड़े की असली वजह क्या है?

पूरा झगड़ा सोना ग्रुप की विरासत और फाउंडेशन के मालिकाना हक के इर्द-गिर्द घूमता है।

मां के आरोप: 80 साल की रानी कपूर ने आरोप लगाया कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। उन्होंने दावा किया कि 2017 में स्ट्रोक आने के बाद, एडमिनिस्ट्रेटिव काम के बहाने उनसे खाली कागज़ात पर साइन करवाए गए, और प्रॉपर्टी उनकी सहमति के बिना फैमिली फाउंडेशन को ट्रांसफर कर दी गई।

बेटे की मौत के बाद झगड़ा बढ़ गया: पिछले जून में लंदन में संजय कपूर की मौत के बाद, झगड़ा तब बढ़ गया जब रानी कपूर ने अपनी बहू प्रिया कपूर पर ग्रुप की मुख्य कंपनियों का कंट्रोल अपने हाथ में लेने और उन्हें परिवार की विरासत में मिली प्रॉपर्टी और घरों से बेदखल करने का आरोप लगाया।

कोर्ट का इंसानी नज़रिया
सुप्रीम कोर्ट ने मीडिएशन की सलाह दी क्योंकि रानी कपूर 80 साल की हैं। कोर्ट ने कहा कि लंबी कानूनी लड़ाई से किसी को फ़ायदा नहीं होगा, खासकर बुज़ुर्ग मुद्दई को। कोर्ट का मानना ​​था कि मीडिएशन के ज़रिए आपसी सहमति से समझौता करना सबसे अच्छा ऑप्शन है।

दिल्ली हाई कोर्ट का कड़ा रुख
इससे पहले, दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इस मामले में एक सख़्त आदेश जारी किया था। हाई कोर्ट ने मृतक के विदेशी बैंक अकाउंट और क्रिप्टोकरेंसी होल्डिंग्स के ऑपरेशन पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने ₹30,000 करोड़ की संपत्ति पर भी यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया, ताकि कोई थर्ड-पार्टी अधिकार न बन सके।

➧ 👉 हमें Google में खोजने के लिए https://www.biharnewsprint.in/लिख कर सर्च करें | |